संजय उवाच

Cut to - from one thought to another


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मैं शब्द हूँ - - -

मुझे देखिये मैं शब्द हूँ ! मैने गौर से देखा वो कई अर्थों से लिपटा था ! सबसे बड़ा अर्थ धर्म का था ! मैंने प्रेम देखा ! प्रेत देखा ! नक्षत्र और ब्रह्माण्ड देखा ! स्त्री और पुरुष देखा ! खून पसीना सब शब्द से लिपटे थे ! मैंने कहा मुझे एक अर्थ का एक शब्द चाहिए ! उसने गति दिखाई मैंने शुन्य देख लिया ! मुझे देखिये मैं शब्द हूँ + + + मुझे सब देख रहे थे और मैं कहीं नहीं था - - -

मेरे ख्याल से - - -

हर नए ख्याल में डगमगाती हुई एक अस्वीकृति होती है जिससे लड़ के सबसे पहले उसको जीतना पड़ता है ! हर नया ख्याल सुनाने पर किसी को सुनायी नहीं देता इसीलिए उसे जोर से बोलना पड़ता है ! हर नए ख्याल का एक हमशक्ल ख्याल होता है जिससे मिल कर उसे झुठलाना पड़ता है ! हर नया ख्याल तब तक सिर्फ एक ख्याल होता है जब तक हम उस पर भरोसा नहीं कर लेते ! ख्याल के खो जाने का डर सबसे व्यस्त ख्याल है ! ख्याल कभी अकेले नहीं रह पाते इसीलिए हम उनके साथ रहते हैं ! ख्याल बहुत जल्द बदलते हैं इसीलिए हम उन्हें बाँटते रहते हैं - - -
& मेरे ख्याल से